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पानी के लिए तरसता सरैया: जब अधिकार बना संघर्ष का कारण

 स्थान: सरैया वार्ड, वाराणसी

दिनांक: 08/07/2025

"पानी हर किसी का अधिकार है, न कि किसी की कृपा।"

यही भावना थी उस बैठक की, जो ‘पहरा’ संस्था द्वारा वाराणसी के सरैया वार्ड में अशरफ अली जी के आवास पर आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य था – सरैया के लोगों को वर्षों से झेलनी पड़ रही पीने के पानी की समस्या पर खुलकर चर्चा करना और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाना।

चार साल और अनसुनी आवाज़ें

बैठक में शामिल समुदाय के लोगों ने बताया कि वे पिछले चार वर्षों से लगातार पानी की समस्या को लेकर नगर निगम, पार्षद, और यहां तक कि मेयर तक से गुहार लगा चुके हैं। हर बार उन्हें आश्वासन मिला, पर नतीजा शून्य रहा। कुछ घरों में पानी कई-कई दिनों तक नहीं आता, तो कुछ को गंदा और अनुपयोगी पानी मिल रहा है। गर्मी के मौसम में स्थिति और विकराल हो जाती है।

संविधान क्या कहता है?

‘पहरा’ ने बैठक में एक महत्वपूर्ण बात रखी –
“पीने का स्वच्छ पानी प्राप्त करना केवल सुविधा नहीं, बल्कि भारतीय संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है।”

संविधान का अनुच्छेद 21 – जीवन जीने का अधिकार – और अनुच्छेद 32 – संवैधानिक उपचारों का अधिकार – इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी नागरिक ऐसी मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित न रहे।
पानी की निरंतर अनुपलब्धता सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संवैधानिक उल्लंघन है।

क्या हो अगला कदम?

‘पहरा’ ने समुदाय से आह्वान किया कि अब वक्त है सिर्फ मांग करने का नहीं, अधिकारों को लेकर संगठित होकर संवैधानिक रास्तों पर चलने का। संस्था ने सुझाव दिया कि यदि स्थानीय प्रशासन समाधान नहीं देता है, तो जनहित याचिका (PIL) या मानवाधिकार आयोग जैसी संस्थाओं का सहारा लिया जा सकता है।

लोगों की भागीदारी

इस बैठक में कुल 32 लोग उपस्थित थे – बुजुर्गों, और युवाओं ने खुलकर अपनी बातें रखीं। यह सिर्फ एक बैठक नहीं थी, बल्कि एक चेतना का प्रारंभ था –
"अब चुप नहीं रहेंगे, अपने अधिकारों के लिए बोलेंगे और संघर्ष करेंगे।"


अंत में...

सरैया की यह कहानी भारत के उन हजारों इलाकों की कहानी है, जहाँ लोग आज भी जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह सिर्फ पानी की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई है।

पहरा ऐसे ही मुद्दों पर संविधान की रोशनी में समाधान तलाशने और समुदाय को जागरूक करने के लिए कार्यरत है।
यदि आप भी अपने क्षेत्र की किसी समस्या को लेकर संवैधानिक समाधान की दिशा में साथ आना चाहते हैं, तो जुड़िए ‘पहरा’ से – जहाँ आवाज़ दबती नहीं, गूंज बनती है।
















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