वाराणसी, दानियालपुर वार्ड – यह कहानी है एक साधारण महिला की, जिनका नाम है अनवरी बेगम। वे वर्षों से अपने परिवार के साथ वाराणसी के दानियालपुर वार्ड में निवास कर रही हैं। उनका जीवन सामान्य है, सीमित साधनों में चलता है, परंतु पिछले कुछ वर्षों से एक अन्यायपूर्ण नगर निगम कर उन्हें परेशान कर रहा था।
अनियमित बढ़ोत्तरी बनी बोझ
अनवरी बेगम का मकान कर (हाउस टैक्स) वर्षों तक ₹500 वार्षिक रहा, जो उनकी आर्थिक स्थिति के अनुरूप था। लेकिन करीब तीन साल पहले, अचानक नगर निगम-वाराणसी द्वारा बिना किसी स्पष्ट जानकारी के यह कर ₹4000 वार्षिक कर दिया गया। यह बढ़ोत्तरी न केवल असमान्य थी, बल्कि अनवरी बेगम जैसे नागरिकों के लिए भारी बोझ भी बन गई।
‘पहरा’ से संपर्क बना समाधान की राह
जुलाई 2025 में अनवरी बेगम के पुत्र निसार ने इस समस्या को लेकर संविधान आधारित सामाजिक संगठन ‘पहरा’ से संपर्क किया। निसार ने बताया कि उन्होंने कई बार नगर निगम से जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
‘पहरा’ की टीम ने निसार को उनके अधिकारों की जानकारी दी और उन्हें सुझाव दिया कि वे संपूर्ण समाधान दिवस में अपनी शिकायत दर्ज करें। संगठन के कार्यकर्ताओं ने उन्हें आवश्यक दस्तावेज़ तैयार करने में भी मदद की और 19 जुलाई 2025 को तहसील-सदर, वाराणसी में प्रार्थना पत्र दिलवाने में सहयोग किया।
नतीजा: कर में हुई न्यायसंगत कमी
प्रशासन द्वारा की गई समीक्षा के बाद नगर निगम-वाराणसी ने अनवरी बेगम के मकान कर को ₹4000 से घटाकर ₹2361 वार्षिक कर दिया। यह बदलाव न केवल एक राहत था, बल्कि यह साक्ष्य है कि जागरूक नागरिक और संगठनों के प्रयास मिलकर व्यवस्था को जवाबदेह बना सकते हैं।
एक छोटा कदम, एक बड़ा संदेश
‘पहरा’ का यह हस्तक्षेप यह साबित करता है कि जब आम नागरिक अपने अधिकारों को जानता है और उनका इस्तेमाल करता है, तो व्यवस्था को सुधारने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
इस घटना ने निसार और उनके जैसे कई नागरिकों को यह सीख दी कि "अन्याय को सहना भी अन्याय है", और अब वे दूसरों को भी अपने हक के लिए बोलने की प्रेरणा दे रहे हैं।

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