सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संपूर्ण समाधान दिवस में पहरा संस्था ने दिलाई लोगों की आवाज़ – राशन, पोषाहार और मकान टैक्स से जुड़ी समस्याओं का समाधान

 

वाराणसी जनपद में वंचित और जरूरतमंद लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुँचाने और उनके अधिकार दिलाने में पहरा संस्था लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में आज तहसील वाराणसी में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में संस्था के सहयोग से तीन अलग-अलग वार्डों से जुड़े लोगों ने अपने मुद्दों को लेकर प्रार्थना पत्र दिया।

✅ जलालीपुरा वार्ड – राशन कार्ड न मिलने की समस्या

अब्दुल अजीज जी ने राशन कार्ड का आवेदन समय पर जमा कर दिया था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बावजूद उन्हें कार्ड जारी नहीं किया गया। इस गंभीर समस्या को लेकर पहरा संस्था ने उनका साथ दिया और प्रार्थना पत्र तैयार कर उन्हें समाधान दिवस में भेजा।

✅ कोनिया वार्ड – बच्चों को पोषाहार का लाभ न मिलना

मो. शाहिद जी के दो बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र से पोषाहार का लाभ नहीं मिल रहा था। बच्चों का पोषण और स्वास्थ्य सीधे प्रभावित हो रहा था। संस्था ने इस मुद्दे को प्रशासन के सामने रखा और बच्चों के अधिकारों की आवाज़ बुलंद की।

✅ दानियालपुर वार्ड – मकान टैक्स बढ़ने की समस्या

मो. इस्माइल जी के मकान का टैक्स अचानक कई गुना बढ़ाकर भेज दिया गया था, जिससे आर्थिक संकट और बढ़ गया। पहरा ने उनका पक्ष प्रशासन तक पहुँचाया ताकि उनके साथ हो रहे अन्याय का समाधान हो सके।


📌 पहरा संस्था का उद्देश्य

यह प्रयास केवल समस्याओं को प्रशासन तक पहुँचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर जरूरतमंद तक उसकी योजना का लाभ पहुँचाना है। संस्था यह मानती है कि समानता, सेवा और न्याय हर नागरिक का अधिकार है।
लोगों को जागरूक करना, आवेदन प्रक्रिया में सहयोग देना और शासन से जवाब मांगने के लिए प्रेरित करना संस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है।


📢 आप भी जुड़िए

यदि आपके आसपास कोई परिवार राशन, पोषण, स्वास्थ्य या अन्य सरकारी योजनाओं से वंचित है तो संस्था पहरा से संपर्क करें। हम मिलकर अपने समाज को जागरूक, सशक्त और अधिकार संपन्न बनाएँगे।


अंतिम शब्द

आज संपूर्ण समाधान दिवस में दी गई आवाज़ें केवल व्यक्तिगत समस्याएँ नहीं हैं, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक चेतना का हिस्सा हैं। पहरा संस्था ऐसे ही कदमों के माध्यम से हर जरूरतमंद तक न्याय पहुँचाने का प्रयास कर रही है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हथकरघा विभाग के अधिकारियों का 'पहरा' कार्यालय दौरा: बुनकरों को मिला समाधान और सहयोग का आश्वासन

हथकरघा विभाग के अधिकारियों का 'पहरा' कार्यालय दौरा: बुनकरों को मिला समाधान और सहयोग का आश्वासन 03 जून 2025 को दीनदयालपुर वार्ड स्थित पुरानापुल बस्ती में ‘पहरा’ संस्था द्वारा लगाए गए जागरूकता शिविर के दौरान हथकरघा विभाग, वाराणसी के पर्यवेक्षक श्री विश्वनाथ विश्वकर्मा द्वारा संस्था के कार्यकर्ताओं को धमकाने एवं परेशान करने की घटना के संबंध में ‘पहरा’ द्वारा की गई शिकायत पर आज विभाग ने संज्ञान लिया। इस क्रम में “हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग - वाराणसी” के वस्त्र निरीक्षक श्री बनारसी दास कुशवाहा एवं क्षेत्रीय निरीक्षक श्री अमजद अली 12 जून 2025 को पहरा कार्यालय पहुँचे। इस दौरान कार्यालय में पहले से उपस्थित बुनकरों से अधिकारियों ने संवाद किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। बुनकरों द्वारा उठाए गए प्रश्नों का यथासंभव समाधान भी मौके पर दिया गया। अधिकारियों ने भविष्य में ‘पहरा’ संस्था द्वारा आयोजित किए जाने वाले शिविरों एवं जागरूकता कार्यक्रमों में विभागीय सहयोग और सहभागिता का पूर्ण आश्वासन भी दिया। यह संवाद संस्था और विभाग के बीच आपसी समझ और क्षेत्रीय बुनकर समुदाय के हितों ...

पानी के लिए तरसता सरैया: जब अधिकार बना संघर्ष का कारण

  स्थान: सरैया वार्ड, वाराणसी दिनांक: 08/07/2025 "पानी हर किसी का अधिकार है, न कि किसी की कृपा।" यही भावना थी उस बैठक की, जो ‘पहरा’ संस्था द्वारा वाराणसी के सरैया वार्ड में अशरफ अली जी के आवास पर आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य था – सरैया के लोगों को वर्षों से झेलनी पड़ रही पीने के पानी की समस्या पर खुलकर चर्चा करना और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाना। चार साल और अनसुनी आवाज़ें बैठक में शामिल समुदाय के लोगों ने बताया कि वे पिछले चार वर्षों से लगातार पानी की समस्या को लेकर नगर निगम, पार्षद, और यहां तक कि मेयर तक से गुहार लगा चुके हैं। हर बार उन्हें आश्वासन मिला, पर नतीजा शून्य रहा। कुछ घरों में पानी कई-कई दिनों तक नहीं आता , तो कुछ को गंदा और अनुपयोगी पानी मिल रहा है। गर्मी के मौसम में स्थिति और विकराल हो जाती है। संविधान क्या कहता है? ‘पहरा’ ने बैठक में एक महत्वपूर्ण बात रखी – “पीने का स्वच्छ पानी प्राप्त करना केवल सुविधा नहीं, बल्कि भारतीय संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है।” संविधान का अनुच्छेद 21 – जीवन जीने का अधिकार – और अनुच्छेद 32 – संवैधानिक उपचारों का...