वाराणसी | पहरा रिपोर्ट
वाराणसी जनपद के चार वार्डों में पहरा (People’s Action for Human Rights Advancement) द्वारा पोषाहार वितरण में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार को अंतिम अवसर प्रदान किया है।
⚖️ न्यायालय की सख्त टिप्पणी
सितंबर 2025 में दिए गए आदेश के बाद भी उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से जवाब प्रस्तुत न किए जाने पर माननीय न्यायालय ने नाराज़गी व्यक्त की।
न्यायालय ने कहा कि राज्य के सरकारी अधिवक्ता बार-बार तारीख लेकर कार्यवाही टाल रहे हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास को बचाने और भ्रष्टाचार के सबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस क्रम में, माननीय न्यायालय ने अब अंतिम अवसर प्रदान करते हुए अगली सुनवाई की तिथि 16 दिसंबर 2025 निर्धारित की है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि उस तिथि तक राज्य का जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो प्रकरण का निस्तारण एकतरफा किया जा सकता है।
🧒 पहरा की भूमिका
पहरा संस्था ने अपने सर्वेक्षण और समुदाय आधारित अध्ययन में यह पाया कि चार वार्डों — जलालीपुरा, नक्खीघाट, दानियालपुर व कोनिया— में बाल विकास विभाग की पोषाहार योजना में गंभीर अनियमितताएँ हो रही थीं।
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कई केंद्रों पर पोषाहार सामग्री की आपूर्ति अधूरी या काल्पनिक रूप में दर्ज की जा रही थी।
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लाभार्थियों के नामों की सूची में फर्जी प्रविष्टियाँ थीं।
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अनेक आंगनवाड़ी केंद्रों में मात्र कागज़ी वितरण हो रहा था।
इन तथ्यों के आधार पर पहरा ने संबंधित विभागों से शिकायत की, परन्तु कार्रवाई न होने पर संस्था ने जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया।
📜 पहरा का कहना
पहरा के प्रतिनिधियों का कहना है —
“यह लड़ाई केवल पोषाहार के घोटाले की नहीं, बल्कि उन बच्चों के अधिकारों की है जिनका भोजन और स्वास्थ्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। न्यायालय से हमें न्याय की आशा है और हम सत्य को सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
🧭 आगे की राह
अब नज़रें 16 दिसंबर 2025 की सुनवाई पर टिकी हैं, जब माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय इस मामले में अगला निर्णय देगा।
पहरा ने कहा है कि संस्था साक्ष्यों की सुरक्षा और जनपक्षीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए समुदाय के साथ मिलकर प्रयास जारी रखेगी।


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