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पहरा–वाराणसी द्वारा आयोजित 2 दिवसीय स्वयंसेवक प्रशिक्षण

पहरा–वाराणसी द्वारा आयोजित 2 दिवसीय स्वयंसेवक प्रशिक्षण : संक्षिप्त रिपोर्ट

आयोजक संस्था: पहरा (People's Action for Human Rights Advancement)
परियोजना क्षेत्र: वाराणसी के 4 वार्ड
प्रतिभागी स्वयंसेवक (कुल): 9 (प्रथम दिन-7)  (द्वितीय दिन-7)

प्रथम दिन की कार्यवाही

परियोजना क्षेत्र के चार वार्ड—कोनिया, नक्खीघाट, जलालीपुरा एवं दानियालपुरसे चयनित कुल 7 सामुदायिक स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण में भाग लिया। प्रतिभागियों में कोनिया से जुबैर बेलाल, नक्खीघाट से मुमताज़, जलालीपुरा से मो. जाहिद तथा दानियालपुर से मो. अशफाक, मो. शोएब और आरजू शामिल रहे।

कार्यशाला की शुरुआत सभी प्रतिभागियों के परिचय सत्र से हुई। इसके पश्चात अनिल कुमार मौर्य द्वारा पहरा के उद्देश्य पर चर्चा की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान प्रत्येक नागरिक को गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है और देश के अंतिम व्यक्ति तक अधिकारों की जानकारी पहुँचाना ही पहरा का प्रमुख लक्ष्य है।

इसके बाद अनुभव साझा सत्र आयोजित हुआ, जिसमें स्वयंसेवकों ने पहरा के सहयोग से प्राप्त सफलताओं को साझा किया—

  • कोनिया के जुबैर ने बताया कि पहली शिकायत पर उनके बच्चे को आंगनवाड़ी से केवल 1 माह का पोषाहार मिला; पुनः शिकायत करने पर 2.5 माह का पोषाहार प्राप्त हुआ।
  • दानियालपुर की आरजू ने बताया कि उनकी माता के नाम से राशन कार्ड आवेदन 4 माह लंबित रहा। पहली शिकायत पर अपात्र बताया गया, किंतु आख्या पर आपत्ति के साथ पुनः शिकायत करने पर राशन कार्ड जारी हुआ।
  • मो. शोएब मो. अशफाक ने साझा किया कि पहरा के मार्गदर्शन में बुनकर प्रमाण पत्र हेतु स्वयं आवेदन किया और बिना किसी आर्थिक भ्रष्टाचार के प्रमाण पत्र प्राप्त किया।

इसके उपरांत समुदाय में स्वयंसेवकों की भूमिकालोगों को संस्था से जोड़ना, अधिकारों के प्रति जागरूक करना और आवश्यकता पड़ने पर पहरा से समन्वय—पर सामूहिक चर्चा हुई। दिन के अंतिम सत्र में संविधान की उद्देशिका तथा संविधान में निहित 6 मौलिक अधिकारों पर विस्तार से जानकारी दी गई।


द्वितीय दिन की कार्यवाही

दूसरे दिन प्रशिक्षण की शुरुआत पिछले दिन के रिकैप से हुई। इस अवसर पर दो नए साथियों—शमीम एवं हकीमुद्दीनका स्वागत किया गया और प्रथम दिन के प्रमुख बिंदुओं का संक्षेप में पुनरावलोकन किया गया।

मुख्य सत्र में यह समझ विकसित की गई कि अधिकार न मिलने की स्थिति में शिकायत हेतु प्रभावी पत्र कैसे लिखा जाए। अनिल जी ने बोर्ड पर पत्र लेखन में आवश्यक बिंदुओं—विषय, तथ्य, साक्ष्य, मांग एवं संपर्क विवरण—को लिखकर समझाया। इसके बाद स्वयंसेवकों से विभिन्न विषयों पर पत्र लेखन का अभ्यास कराया गया, जो अधिकांश प्रतिभागियों के लिए नया और उपयोगी अनुभव रहा।

अंतिम सत्र में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रोजेक्टर के माध्यम से जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने, उचित विभाग का चयन/सर्च तथा शिकायत की ट्रैकिंग की संपूर्ण जानकारी साझा की गई।


प्रमुख निष्कर्ष

  • स्वयंसेवकों की भूमिका, जिम्मेदारियों और सीमाओं पर स्पष्टता बनी।
  • संवैधानिक अधिकारों और शिकायत तंत्र की व्यावहारिक समझ विकसित हुई।
  • पत्र लेखन एवं ऑनलाइन शिकायत प्रक्रिया से आत्मविश्वास बढ़ा।
  • समुदाय-आधारित कार्य को संस्थागत सहयोग से जोड़ने की दिशा स्पष्ट हुई।

निष्कर्ष: यह 2 दिवसीय प्रशिक्षण स्वयंसेवकों के क्षमता-वर्धन, अधिकार-जागरूकता और समुदाय में प्रभावी हस्तक्षेप हेतु एक महत्वपूर्ण एवं सफल पहल सिद्ध हुआ।











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