सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सीवर कनेक्शन नहीं, फिर भी मकान टैक्स में ‘सीवर कनेक्शन’ शुल्क! — तहसील दिवस में 4 नागरिकों की शिकायत दर्ज

 दिनांक: (17.01.2026)

स्थान: वाराणसी

आज पहरा-वाराणसी के सहयोग से वाराणसी जनपद के दो क्षेत्रों के कुल 4 नागरिकों ने तहसील दिवस में अपनी-अपनी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत का विषय यह है कि सीवर कनेक्शन लगा ही नहीं है, इसके बावजूद मकान टैक्स में “सीवर कनेक्शन/सीवर शुल्क” जोड़कर बिल भेजा जा रहा है।

शिकायत दर्ज कराने वाले नागरिक

  1. दानियालपुर

    • श्री मुस्ताक अहमद

    • श्री अब्दुल कलाम

  2. नक्खीघाट

    • श्री मुमताज़ अहमद

    • श्री इम्तेयाज़

इन सभी ने लिखित रूप से बताया कि उनके घरों में वास्तविक रूप से सीवर कनेक्शन उपलब्ध नहीं है, लेकिन टैक्स/बकाया निर्धारण में सीवर से संबंधित मद जोड़कर भुगतान की मांग की जा रही है। यह स्थिति आम नागरिकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालती है और शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करती है।

मुख्य मांगें

शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से निम्न कार्यवाही की मांग की:

  • संबंधित घरों में सीवर कनेक्शन की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन कराया जाए।

  • यदि कनेक्शन नहीं है तो मकान टैक्स से सीवर शुल्क हटाया जाए और जो अतिरिक्त धनराशि जोड़ी गई है उसका सुधार/समायोजन/वापसी सुनिश्चित की जाए।

  • यह स्पष्ट किया जाए कि बिना कनेक्शन के सीवर शुल्क किस आधार पर जोड़ा गया और जिम्मेदार अधिकारी/कार्मिक की जवाबदेही तय हो।

  • भविष्य में ऐसी त्रुटि न हो इसके लिए वार्ड स्तर पर टैक्स रिकॉर्ड का सुधार और पारदर्शी प्रक्रिया लागू की जाए।

पहरा-वाराणसी का पक्ष

पहरा-वाराणसी मानता है कि किसी भी नागरिक से बिना सेवा/सुविधा उपलब्ध कराए उसके नाम पर शुल्क वसूलना न्यायसंगत नहीं है। संस्था नागरिकों को उनकी शिकायतें दर्ज कराने, दस्तावेज़ तैयार करने और प्रशासनिक प्रक्रिया समझने में सहयोग करती रहेगी, ताकि प्रत्येक व्यक्ति अपने अधिकारों का संवैधानिक तरीके से उपयोग कर सके।

आगे की कार्यवाही

पहरा-वाराणसी संबंधित विभाग से शिकायतों पर प्राप्ति/कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) लेने की प्रक्रिया अपनाएगा और जरूरत पड़ने पर प्रकरण को उच्च स्तर तक उठाया जाएगा।

नागरिकों से अपील:

यदि आपके घर में सीवर कनेक्शन नहीं है, फिर भी मकान टैक्स में सीवर शुल्क जोड़ा जा रहा है, तो अपना टैक्स बिल/रसीद, पहचान पत्र, मकान से संबंधित दस्तावेज, और क्षेत्र का विवरण लेकर शिकायत दर्ज कराएं।

पहरा-वाराणसी



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हथकरघा विभाग के अधिकारियों का 'पहरा' कार्यालय दौरा: बुनकरों को मिला समाधान और सहयोग का आश्वासन

हथकरघा विभाग के अधिकारियों का 'पहरा' कार्यालय दौरा: बुनकरों को मिला समाधान और सहयोग का आश्वासन 03 जून 2025 को दीनदयालपुर वार्ड स्थित पुरानापुल बस्ती में ‘पहरा’ संस्था द्वारा लगाए गए जागरूकता शिविर के दौरान हथकरघा विभाग, वाराणसी के पर्यवेक्षक श्री विश्वनाथ विश्वकर्मा द्वारा संस्था के कार्यकर्ताओं को धमकाने एवं परेशान करने की घटना के संबंध में ‘पहरा’ द्वारा की गई शिकायत पर आज विभाग ने संज्ञान लिया। इस क्रम में “हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग - वाराणसी” के वस्त्र निरीक्षक श्री बनारसी दास कुशवाहा एवं क्षेत्रीय निरीक्षक श्री अमजद अली 12 जून 2025 को पहरा कार्यालय पहुँचे। इस दौरान कार्यालय में पहले से उपस्थित बुनकरों से अधिकारियों ने संवाद किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। बुनकरों द्वारा उठाए गए प्रश्नों का यथासंभव समाधान भी मौके पर दिया गया। अधिकारियों ने भविष्य में ‘पहरा’ संस्था द्वारा आयोजित किए जाने वाले शिविरों एवं जागरूकता कार्यक्रमों में विभागीय सहयोग और सहभागिता का पूर्ण आश्वासन भी दिया। यह संवाद संस्था और विभाग के बीच आपसी समझ और क्षेत्रीय बुनकर समुदाय के हितों ...

पानी के लिए तरसता सरैया: जब अधिकार बना संघर्ष का कारण

  स्थान: सरैया वार्ड, वाराणसी दिनांक: 08/07/2025 "पानी हर किसी का अधिकार है, न कि किसी की कृपा।" यही भावना थी उस बैठक की, जो ‘पहरा’ संस्था द्वारा वाराणसी के सरैया वार्ड में अशरफ अली जी के आवास पर आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य था – सरैया के लोगों को वर्षों से झेलनी पड़ रही पीने के पानी की समस्या पर खुलकर चर्चा करना और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाना। चार साल और अनसुनी आवाज़ें बैठक में शामिल समुदाय के लोगों ने बताया कि वे पिछले चार वर्षों से लगातार पानी की समस्या को लेकर नगर निगम, पार्षद, और यहां तक कि मेयर तक से गुहार लगा चुके हैं। हर बार उन्हें आश्वासन मिला, पर नतीजा शून्य रहा। कुछ घरों में पानी कई-कई दिनों तक नहीं आता , तो कुछ को गंदा और अनुपयोगी पानी मिल रहा है। गर्मी के मौसम में स्थिति और विकराल हो जाती है। संविधान क्या कहता है? ‘पहरा’ ने बैठक में एक महत्वपूर्ण बात रखी – “पीने का स्वच्छ पानी प्राप्त करना केवल सुविधा नहीं, बल्कि भारतीय संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है।” संविधान का अनुच्छेद 21 – जीवन जीने का अधिकार – और अनुच्छेद 32 – संवैधानिक उपचारों का...